- पुलिस की इस हरकत को क्या कहेंगे?????? : तो ठीक है करविमर्श, कर लेतें है हम ।
- अमिताभजी और मेरे सेलेब्रिटी स्टेटस के साईड इफ़्फ़ेक्ट्स! : किसी अच्छे से डाक्टर को दिखाइए ,
- अच्छा हुआ जो साहित्य मर गया : वरना ,"ये", मार देते ।
- राज के लिए बुरी ख़बर :बिहार में बनेगा भोजपुरी फिल्म स्टूडियो
- बहती गंगा में, में हाथ धो लीजिए क्योंकि " हाथ में बारूद की गंध " आ रही है।
- आतंकवाद यानी, लाठी "ताऊ ", की लाठी ,की आवाज़ ।
- दास्तान - ए - लोकतंत्र , एक और ढोलक पोल वाली,
- हृदय रोग की अपु्र्व दवा , और कारण दौनो ही है आपके पास ,"मन के भीतर खोजो,,कहीं कोई " मासूम "सी सोच तो नहीं पल रही है आपमें ।"नेताजी का मोबाइल", खतरनाक संदेश तो नहीं॥?,
- कहीं इनका चुनाव का टिकट कट तो नहीं गया सियासत से ही ।
- दीपावली के अवसर पर लिखी एक ताज़ा ग़ज़ल् अभी तक पता नहीं कितनी ताज़गी है देवउठनी ग्यारस की ठीक उसी दिन पडवा देना जी ।
A TRIBUTE TO SHIRDEE SAI BABADEVOTIONAL ALBUM "BAWARE FAQEERA" VOICE :- *ABHAS JOSHI {Mumbai/Jabalpur} *SANDEEPA PARE {Bhopal} MUSIC:- *SHREYASH JOSHI { Mumbai/Jabalpur } LYRICS:- *GIRISH BILLORE ;MUKUL (Jabalpur) FOR FURTHER DETAILS & YOUR SUGESSTIONS CONTACT [1] girishbillore@gmail.com [2] girish_billore@rediffmail.com [3] PHONE 09479756905 pl send crossed cheque of Rs.60/-(Rs.50 +Rs. 10/) for one CD to Savysachi Kala Group 969/A-2,Gate No.04 Jabalpur MADHY-PRADESH,INDIA
Friday, November 7, 2008
अँधा बांटे रेवडी : ब्लॉग चर्चा
Wednesday, November 5, 2008
"जय ब्लॉगर जय हिन्दी ब्लागिंग " लिंक पोस्ट
Monday, November 3, 2008
"सुनो....सुनो.....सुनो.....साहित्य लेखन के विषय चुक गए हैं...! "
चिंता और ऊहापोह वश ,गुरुदेव ने ऐलान कर दिया-"सुनो....सुनो.....सुनो.....साहित्य लेखन के विषय चुक गए हैं...! "क्या................विषय चुक गए हैं ? हाँ, विषय चुक गए हैं ! तो अब हम क्या करें....? विषय का आयात करो कहाँ से .... ? चीन से मास्को से .....? अरे वही तो चुक गए हैं....! फ़िर हम क्या करें..........? लोकल मेन्यूफेक्चरिंग शुरू करो औरत का जिस्म हो इस पे लिखो भगवान,आस्था विश्वास....भाषा रंग ..! अरे मूर्ख ! इन विषयों पे लिख के क्या दंगे कराएगा . तो इन विषयों पर कौन लिखेगा ? लिखेगा वो जिसका प्रकाशन वितरण नेट वर्क तगड़ा हो वही लिखेगा तू तो ऐसा कर गांधी को याद कर , ज़माना बदल गया बदले जमाने में गांधी को सब तेरे मुंह से जानेंगे तो ब्रह्म ज्ञानी कहाएगा ! गुरुदेव ,औरत की देह पर ? लिख सकता है खूब लिख इतना कि आज तक किसी ने न लिखा हो ******************************************************************************************
लोग बाग़ चर्चा करेंगे, करने दो हम यही तो चाहतें हैं कि इधर सिर्फ़ चर्चा हो काम करना हमारा काम नहीं है. " तो गुरुदेव, काम कौन करेगा ? जिसको काम करके रोटी कमाना हो वो करे हम क्यों हम तो ''राजयोग'' लेकर जन्में है.हथौड़ा,भी सहज और हल्का सा हो गया है . वेद रत्न शुक्ल,, की टिप्पणी अपने आप में एक पूरी पोस्ट बन गई इस ब्लॉग पर ***********************************************************************************इंक ब्लागिंग
इंक ब्लागिंग की सचाई ये है कि तीसरा शेर सुधारने के लिए कटा पिटी करनी होती किंतु ऑन लाइन में ऐसा नहीं फ़िर कित्ते इंतजाम लगते हैं अनूप जी,है न समीर भाई लिखो फोटो खींचो नीले दाँतों से ट्रांसफर करो यानी घंटे भर की मशक्कत कोई आएगा इसकी कोई गारंटी नहीं !
Sunday, November 2, 2008
उमर-खैयाम की रुबाइयों के अनुवाद कर्ता कवि स्वर्गीय केशव पाठक
मुक्तिबोध की ब्रह्मराक्षस का शिष्य, कथा को आज के सन्दर्भों में समझाने की कोशिश करना ज़रूरी सा होगया है । मुक्तिबोध ने अपनी कहानी में साफ़ तौर पर लिखा था की यदि कोई ज्ञान को पाने के बाद उस ज्ञान का संचयन,विस्तारण,और सद-शिष्य को नहीं सौंपता उसे मुक्ति का अधिकार नहीं मिलता । मुक्ति का अधिकारक्या है ज्ञान से इसका क्या सम्बन्ध है,मुक्ति का भय क्या ज्ञान के विकास और प्रवाह के लिए ज़रूरीहै । जी , सत्य है यदि ज्ञान को प्रवाहित न किया जाए , तो कालचिंतन के लिए और कोई आधार ही न होगा कोई काल विमर्श भी क्यों करेगा। रहा सवाल मुक्ति का तो इसे "जन्म-मृत्यु" के बीच के समय की अवधि से हट के देखें तो प्रेत वो होता है जिसने अपने जीवन के पीछे कई सवाल छोड़ दिये और वे सवाल उस व्यक्ति के नाम का पीछा कर रहेंहो । मुक्तिबोध ने यहाँ संकेत दिया कि भूत-प्रेत को मानें न मानें इस बात को ज़रूर मानें कि "आपके बाद भी आपके पीछे " ऐसे सवाल न दौडें जो आपको निर्मुक्त न होने दें !जबलपुर की माटी में केशव पाठक,और भवानी प्रसाद मिश्र में मिश्र जी को अंतर्जाल पर डालने वालों की कमीं नहीं है किंतु केशवपाठक को उल्लेखित किया गया हो मुझे सर्च में वे नहीं मिले । अंतरजाल पे ब्लॉगर्स चाहें तो थोडा वक्त निकाल कर अपने क्षेत्र के इन नामों को उनके कार्य के साथ डाल सकतें है । मैं ने तो कमोबेश ये कराने की कोशिश की है । छायावादी कविता के ध्वजवाहकों में अप्रेल २००६ को जबलपुर के ज्योतिषाचार्य लक्ष्मीप्रसाद पाठक के घर जन्में केशव पाठक ने एम ए [हिन्दी] तक की शिक्षा ग्रहण की किंतु अद्यावासायी वृत्ति ने उर्दू,फारसी,अंग्रेजी,के ज्ञाता हुए केशव पाठक सुभद्रा जी के मानस-भाई थे । केशव पाठक का उमर खैयाम की रुबाइयों के अनुवाद..">उमर खैयाम की रुबाइयों के अनुवाद..[०१] करना उनकी एक मात्र उपलब्धि नहीं थी कि उनको सिर्फ़ इस कारण याद किया जाए । उनको याद करने का एक कारण ये भी है-"केशव विश्व साहित्य और खासकर कविता के विशेष पाठक थे " विश्व के समकालीन कवियों की रचनाओं को पड़ना याद रखना,और फ़िर अपनी रचनाओं को उस सन्दर्भ में गोष्टीयों में पड़ना वो भी उस संदर्भों के साथ जो उनकी कविता की भाव भूमि के इर्द गिर्द की होतीं थीं ।समूचा जबलपुर साहित्य जगत केशव पाठक जी को याद तो करता है किंतु केशव की रचना धर्मिता पर कोई चर्चा गोष्ठी ..........नहीं होती गोया "ब्रह्मराक्षस के शिष्य " कथा का सामूहिक पठन करना ज़रूरी है। यूँ तो संस्कारधानी में साहित्यिक घटनाओं का घटना ख़त्म सा हो गया है । यदि होता भी है तो उसे मैं क्या नाम दूँ सोच नहीं पा रहा हूँ । इस बात को विराम देना ज़रूरी है क्योंकि आप चाह रहे होंगे [शायद..?] केशव जी की कविताई से परिचित होना सो कल रविवार के हिसाबं से इस पोस्ट को उनकी कविता और रुबाइयों के अनुवाद से सजा देता हूँ
Friday, October 31, 2008
"चिंता ही नहीं चिंतन भी :
Wednesday, October 29, 2008
मित्र चर्चा 02 : राजीव गुप्त: जन्म दिन मुबारक़ हो
राजीव गुप्ता , है स्वर्गीय पत्रकार श्री "हीरालाल गुप्त मधुकर ",के पुत्र साथ ही एक कुशल संगठक मौनचिन्तक आज इअनके जन्म-दिवस पर हमारी और से हार्दिक शुभ कामनाएं
{छवि:साभार डाक्टर विजय तिवारी 'किसलय' के ब्लॉग "यहाँ से ", }मित्र चर्चा 01 : गणेश मिश्रा जी एक सफल चरित्र
जीवन में कष्ट फ़िर भी
Tuesday, October 14, 2008
सुनो समय
Wednesday, October 8, 2008
फ़िल्म आज फ़िर जीने की तमन्ना है में आभास जोशी का अहम किरदार होगा
जबलपुर में अपने चाहने वालों के साथ
आभास फिल्म में बतौर गायक ही नहीं ">कम उम्र , ही ,आभास फिल्म में बतौर गायक ही नहीं ">आभास , - ने जो कर दिखाया ,बावरे-फकीरा ", यानी सद्गुरुसाईं नाथ की कृपा ही कहूँगा। संकोची तो नहीं पर सभी का सम्मान करता है आभास मुझे गोल गुड्डे से आभास की बचपन की यादे और आज उसका मुकान देख कर लगता है गोया दुनियाँ में कुछ भी असंभव कभी नहीं शत्रुघ्न सिंहां की पत्नी की फ़िल्म में अहम् भुमिका में आभास रेखा और शत्रु जी के बेटे के रूप में नज़र आएगा ।एक दैनिक समाचार पत्र के प्रायोजन में गरबा-महोत्सव के समापन कराने आए आभास ने बताया की मुझे लगातार व्यस्त कर दिया फ़िल्म और संगीत इंडस्ट्री ने । जबलपुर और मध्य प्रदेश के लिए इस गौरव पुत्र पर गर्व की बात ये भी है की वो आज भी कस्बाई शहर को नहीं भूल पाया ।
Monday, October 6, 2008
खुला ख़त: अज्ञातानंद जी के नाम
<="चित्र:मिसिजीवी जी से साभार "
Tuesday, September 30, 2008
बाबा हरभजन सिंह मन्दिर फोटो ब्लॉग
According to legend, Harbhajan Singh drowned in a glacier during the 1962 Sino-Indian War. A manhunt was launched to find him. He was found three days later and cremated with full military honours. It was said Harbhajan led the search party to his body, and later, through a dream, instructed one of his colleagues to build and maintain a shrine after him. A shrine was built at his samadhi in the hills. Army folklore holds Baba is a stickler for discipline and is known to admonish those who do not tow this line.
A camp bed is kept for him and his boots are polished and uniform kept ready every night. The sheets are reportedly crumpled every morning and boots muddy by evening. The soldier continues to draw a salary and takes his annual leave. Legend also has it that in the event of a war between India and China, Baba would warn the Indian and Chinese soldiers three days in advance.
During the flag meetings between the two nations at Nathula, the Chinese set a chair aside for the saint. Every year on September 14, a jeep departs with his personal belongings to the nearest railway station, New Jalpaiguri, where it is then sent by train to the village of Kuka, in Kapurthala district in Punjab.
A small sum is also sent to his mother each month. His name still continues in the army's payrolls, his mother has still been getting his salary cheques and he has also been given all due time bound promotions.
Accordingly, presently the late soldier is treated as honorary captain. He is granted two months annual leave every year, a berth is booked in train in his name and his portrait, uniform and other belongings are brought by army officials to his native village Kuka in Kapurthala district for availing leave.
Under this annual drill, belongings of "Baba" Harbhajan Singh were brought to Jalandhar from New Jalpaigudi by Dibrugarh Express on Thursday night.
A JCO, a Subedar and an Orderly accompanied the belongings. The family of the late soldier received the belongings at the railway station and later proceeded for their native village. On completion of the leave the same team of the army personnel will escort back the belongings to the Nathu La region.
एक और आलेख Baba Harbhajan Singh: A story of a dead sepoy, जो Sikkim: A Himalayanreview, पर प्रकाशित है ब्लॉगर मनीष कुमार के चिट्ठे एक शाम मेरे नाम पर सफर सिक्किम का: छान्गू झील, नाथू ला और बाबा मन्दिर एक पोस्ट है कुछ मेरी कलम से kuch meri kalam se ** , पर एक अन्य पोस्ट [-क्या मरने के बाद भी जीवन है ]में विस्तार से हिन्दी में लिखी गयी पोस्ट को यहाँ पुन:प्रकाशित करने का दू:स्साहस कर रहा हूँ किंतु रंजू जी ने कॉपी पेस्ट वर्जित किया है सो लिंक डाले देता हूँ http://ranjanabhatia.blogspot.com/2008/01/blog-post_12.html,शिर्डी साईं को समर्पित "बावरे-फकीरा"
Tuesday, September 23, 2008
आतंकवाद बनाम कबीलियाई वृत्ति
Monday, September 15, 2008
अमिय पात्र सब भरे भरे से ,नागों को पहरेदारी
गली गली को छान रहें हैं ,देखो विष के व्यापारी,
****************************************
मुखर-वक्तता,प्रखर ओज ले भरमाने कल आएँगे
मेरे तेरे सबके मन में , झूठी आस जगाएंगे
फ़िर सत्ता के मद में ये ही,बन जाएंगे अभिसारी
..................................देखो विष के व्यापारी,
****************************************
कैसे कह दूँ प्रिया मैं ,कब-तक लौटूंगा अब शाम ढले
बम से अटी हुई हैं सड़कें,फैला है विष गले-गले.
बस गहरा चिंतन प्रिय करना,खबरें हुईं हैं अंगारी
..................................देखो विष के व्यापारी,
****************************************
लिप्सा मानस में सबके देखो अपने हिस्से पाने की
देखो उसने जिद्द पकड़ ली अपनी ही धुन गाने की,
पार्थ विकल है युद्ध अटल है छोड़ रूप अब श्रृंगारी
..................................देखो विष के व्यापारी,
Friday, August 22, 2008
मोहित
अन्नू कपूर मोहित हुए आभास के अन्दर की सरस्वती को किया प्रणाम
Tuesday, August 19, 2008
क्लिक-सलाम:विश्व छायांकन दिवस पर विशेष
Friday, June 20, 2008
Monday, June 2, 2008
:-"ख़ुद से कैसे भाग सकेगा अंतस
Saturday, May 3, 2008
कुछ तो शर्म करिए
Sunday, April 27, 2008
बावरे फकीरा मेक
आशीष सक्सेना की मेहनत ,श्रेयस के संकल्प से
बावरे फकीरा पूरा हुआ
मुझे यकीन था कि आभास के सुर सह गायिका संदीपा पारे के सुरों का
साथ पाकर इस एलबम को जो ऊंचाई देंगे उसके लिए "बाबा के कृपा "
कहना ही शेष होगा,और हम कह भी क्या सकते हैं......!!
मुझे चिंता नहीं है आपका प्यार भी तो है हमारी साथ
गिरीश बिल्लोरे
Thursday, April 24, 2008
प्रतिभा और बाज़ार
Saturday, March 29, 2008
*KHAZANA*: "लाडली-लक्ष्मी"से बालिकाओं के लिए सोच बदली है...!!"#links#links#links#links#links#links
आभास आज 18 साल का हों गया है
Thursday, March 27, 2008
Tuesday, March 25, 2008
Sunday, March 23, 2008
उपयोग करके फैंकिए मत
आस का किसी ने जगाया था । उसने जीवन हर मोड़ पे नए नवेले मीठे-मीठे , खट्टे-खट्टे अनुभव की पोटली लेकर दिखाई दिया । वो सच्चा आदमी जब किसी का साथ देता तब डिफैन्सिव नहीं होता उसे अपना लक्ष्य स्पस्ट रूप से दिखाई दे रहा था। चलिए उस आदमी को नाम दे देतें हैं , उसका नाम आलू चमन था......अपना खून पसीना रामलाल को सफल करने में गिराता रहा । रामलाल अपनी जिन्दगी के साधारण स्तर से आजिज़ आ गया था , हर और आंशिक सफलता और क्विंटल भर असफलताएं लिए ख़ाक छानता । आलू चमन की मदद से आगे और आगे बढ़ता अब भूल गया लगता है रामलाल । ऐसे राम लालों की कमी कतई नहीं । इतने मकसद परस्तो,डिफेंसिव-खिलाडियों में कहीं आप तो नहीं यदि आप हैं तो आज कोशिश कीजिए उस मोटी कैंचुली से बाहर निकलनें की । शायद व्यावसायिकता के दौर से ,इंसानियत को बचा लाने में सफल होगें हम और आप
Sunday, March 16, 2008
होली तो ससुराल
आभार
स्पन्दन के लिए बेजी का कैसे आभार करें
नौ महीने गर्भ में आरंभ वात्सल्य ये सभी पोस्ट काबिले सम्मान हैं...
आभार
Thursday, March 6, 2008
महिला दिवस पर एक चिंतन "चिंता नहीं चिंतन की ज़रूरत है"
सुनीता शानू जी.....ने.....महिला दिवस पर एक सामयिक रचना ......ब्लाग पर पोस्ट की है एक क्लिक कीजिए कविता केलिए मै और तुम उनके ब्लोंग पर यहाँ क्लिक करके देखिए "मन पखेरू फ़िर उड़ चला"
Saturday, March 1, 2008
रामकृष्ण गौतम
Thursday, February 28, 2008
मध्य-प्रदेश लेखक संघ ने प्रस्ताव आहूत किए
- अक्षर-आदित्य-सम्मान, आयु-सीमा ६० वर्ष,
- पुष्कर-सम्मान,६० वर्ष तक की आयु सीमा
- देवकी-नंदन-सम्मान,३५-५० , आयु वर्ग के रचनाकारों के लिए,
- काशी-बाई-मेहता-सम्मान,किसी भी आयु की महिला लेखिका,के लिए,
- कस्तूरी देवी चतुर्वेदी,लोक-भाषा-सम्मान,म०प्र० की लोक भाषा, की महिला साहित्यकार को , योग्य प्रस्ताव के अभाव में पुरुष साहित्यकार के नाम पर विचार किया जाएगा ,
- माणिक वर्मा,व्यंग्य-सम्मान,
- चंद्रप्रकाश जायसवाल,बाल-साहित्य-सम्मान,
- पार्वती देवी मेहता अहिन्दी भाषी हिन्दी-साहित्यकार
- डा० संतोष कुमार तिवारी -समीक्षा सम्मान, ६० वर्ष आयु से अधिक आयु के समीक्षक को , शिथिलाताएं संभावित
- हरिओम शरण चौबे गीतकार सम्मान,
- कमला देवी लेखिका सम्मान
- मालती वसंत सम्मान [द्वि-वार्षिक ] १८ वर्ष आयु वर्ग की युवा लेखिका को
- सारस्वत-सम्मान,
- अमित रमेश शर्मा हास्य-व्यंग्य के लिए
प्रस्ताव के लिए म०प्र० के साहित्यकार,जिला एकांशों के पदाधिकारियों से सम्पर्क कर सकते हैं । अथवा निम्न लिखित पतों पर सम्पर्क
कीजिए:-
- श्री बटुक-चतुर्वेदी ,१४/८,परी-बाज़ार,शाहाज़हानाबाद, भोपाल,म०प्र०
- गिरीश बिल्लोरे मुकुल एकांश अध्यक्ष , जबलपुर ,एकांश,९६९/ए-२,गेट न० ०४, जबलपुर
[ क्रमांक २ से केवल प्रस्ताव हेतु प्रपत्र -प्राप्ति हेतु सम्पर्क कीजिए]
Wednesday, February 27, 2008
Monday, February 25, 2008
एक ख़त : पूर्णिमा वर्मन जी के नाम
Sunday, February 24, 2008
किसी रंजिश को हवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी !!
Feb 21, 05:05 pm
फिरोजपुर [जागरण संवाददाता]। ंवो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी.. हे राम. व आदमी आदमी को क्या देगा जो भी देगा खुदा देगा.. जैसी कालजयी गजलें लिखने वाले मशहूर शायर सुदर्शन फाकिर सोमवार को इस दुनिया से रुखसत हो लिए। अफसोस कि पंजाब को एक अलग पहचान देने वाले इस शख्स को पंजाबियों और पंजाब ने नहीं पहचाना।
वर्ष 1937 में फिरोजपुर के गुरुहरसहाय कस्बे के रत्ताखेड़ा गांव में डाक्टर बिहारी लाल कामरा के यहां जन्म लेने वाले सुदर्शन फाकिर के परिवार में दो अन्य भाई भी थे। बड़े भाई का देहांत हो चुका है। जालंधर में रहने वाले छोटे भाई विनोद कामरा के यहां फाकिर साहब ने जिंदगी के आखिरी लम्हे बिताए।
फाकिर साहब के अजीज मित्रों कहना है कि उनकी याददाश्त काफी तेज थी। जिस शख्स से वह मिल लेते थे, उसे दोबारा अपना नाम नहीं बताना पड़ता था। यह अलग बात है कि फाकिर साहब को उनके घर का पता कभी याद नहीं रहा। वर्ष 1970 से पहले जालंधर में आल इंडिया रेडियो में नौकरी करने वाले फाकिर साहब को वहां मन नहीं लगा। उन्होंने नौकरी छोड़ दी और मुंबई चले आए। 2005 में वह मुंबई से वापस आकर जालंधर में अपने छोटे भाई के यहां रहने लगे। सत्तर के करीब गजल लिखने वाले फाकिर की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन दिनों बेगम अख्तर सिर्फ पाकिस्तान के शायरों की गजल ही गाया करती थीं। मगर, फाकिर साहब पहले भारतीय शायर हैं, जिनकी लिखी गजल बेगम अख्तर ने बुलाकर ली और अपनी आवाज दी। वह मशहूर गजल थी 'इश्क में गैरते जज्बात नेरोने न दिया..'। बाद में चित्रा सिंह ने भी इसे गाया था।
मोहम्मद रफी ने उनकी गजल 'फलसफे इश्क में पेश आए हैं सवालों की तरह..' गाकर दुनिया में धूम मचा दी। इस नज्म ने फाकिर को नई पहचान दी। जब गजल गायक जगजीत सिंह ने उनके द्वारा लिखी गजल 'वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी.' गाया उसके बाद फाकिर केनाम का डंका दुनिया में ऐसा गूंजा कि उसकी खनक आज भी सुनाई देती है। उनके द्वारा लिखित गजल 'जिंदगी मेरे घर आना..' गाकर भूपिंदर सिंह ने फिल्म फेयर अवार्ड जीता। वहीं गुलाम अली ने 'कैसे लिखोगे मोहब्बत की किताब तुम तो करने लगे पल-पल का हिसाब..' गाकर गजलों के इस सम्राट को सलाम किया था। फाकिर का अंतिम शेर जो दुनिया के सामने नहीं आ सका, वह था 'लाश मासूम की हो या कि कातिल की, जनाब हमने अफसोस किया है..'। वर्ष 1982 में गजल की एक कैसेट रिलीज की गई थी, उसमें मीरा व कबीर के सात भजन थे और आठवां भजन फाकिर साहब ने लिखा था। वहीं फाकिर साहिब का एक गीत 'आखिर तुम्हें आना है जरा देर लगेगी..' भी काफी पसंद किया गया था। इसका बालीवुड फिल्म यलगार के लिए इस्तेमाल किया गया था। http://in.jagran.yahoo.com/news/national/general/5_1_4198016/ पर सम्पूर्ण समाचार उपलब्ध है। हिंद-युग्म के राजीव रंजन,शैलेश जी , फाकिर साहब के जीवन और उनको सूचना संसार से उपेक्षित रहने को लेकर दु:खी हें
जिन्दगी से बात करतीं गजल,जिन्दगी की बात करती ग़ज़ल, और जब सुदर्शन जी की शायरी ,बेगम अख्तर की आवाज़ के रथ पे सवार लगती कोई साम्राज्ञी की शोभा यात्रा हो, नए दौर में जगजीत सिंह के स्वरों के जारी हमारे कानों से सीधे दिल मी उतर वहीं बस गयी लगती फाकिर साहब की गज़लें.
यूनुस खान ने बताया की सुदर्शन फाकिर इंटरव्यू, आत्म प्रकाशन जैसी बातों से दूर ही रहतें थे .
एक गंभीर शायर जो आम बोल चाल के शब्दों को ग़ज़ल में आसानी से बदल देने वाले सुदर्शन फाकिर नहीं रहे वो बात कैसे लाते थे सादगी अपने कलाम में सुदर्शन फाकिर इस बात को समझने के लिए अब केवल हमको निर्भर रहना होगा उनकी रचनाओं पर
किसी रंजिश को हवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी मुझ को एहसास दिला दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी
मेरे रुकने से मेरी साँसे भी रुक जायेंगी फ़ासले और बड़ा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी
ज़हर पीने की तो आदत थी ज़मानेवालो अब कोई और दवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी
चलती राहों में यूँ ही आँख लगी है 'फ़ाकिर' भीड़ लोगों की हटा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी
v सुदर्शन फ़ाकिर की रचनाएँ
आदमी आदमी को क्या देगा
आज के दौर में ऐ दोस्त
आज तुम से बिछड़ रहा हूँ
अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें
अहल-ए-उल्फ़त के हवालों पे
चराग़-ओ-आफ़ताब ग़ुम
ढल गया आफ़ताब ऐ साक़ी
दिल के दीवार-ओ-दर पे क्या देखा
दुनिया से वफ़ा करके
फ़ल्सफ़े इश्क़ में पेश आये
ग़म बढ़े आते हैं
हम तो यूँ अपनी ज़िन्दगी से मिले
इश्क़ में ग़ैरत-ए-जज़्बात
जब भी तन्हाई से घबरा के
जिस मोड़ पर किये थे
किसी रंजिश को हवा दो
कुछ तो दुनिया की इनायात
मेरे दुख की कोई दवा न करो
मेरी ज़ुबाँ से मेरी दास्ताँ
पत्थर के ख़ुदा पत्थर के सनम
फिर आज मुझे तुम को
सामने है जो उसे लोग बुरा कहते हैं
शायद मैं ज़िन्दगी की सहर
शैख़ जी थोड़ी सी पीकर आइये
उल्फ़त का जब किसी ने
उस मोड़ से शुरू करें
ये दौलत भी ले लो
ये शीशे ये सपने
ज़ख़्म जो आप की इनायत है
ज़िन्दगी तुझ को जिया है
वो काग़ज़ की कश्ती
दिल तोड़ दिया
पत्थर के ख़ुदा
गिरीश बिल्लोरे "मुकुल"
9424358167
girishbillore@gmail.com
other link's http://www.hindimedia.in/content/blogsection/6/66/ ,http://in.jagran.yahoo.com/news/national/general/5_1_4198016/
Friday, February 22, 2008
पंकज गुलुश ने भी याद किया तिरलोक जी को ,मुझे भी याद आ रहे हें....!
सत्य के साथ सृजनगाथा
तनवीर जी की पोस्ट हटाई सृजनगाथा ने
रायपुर से वेब पर प्रकाशित होने वाली सृजनगाथा के संपादक जी ने सत्यनिष्ठ होने का परिचय देकर साहित्य और न्याय का समर्तन किया और तनवीर जाफरी के नाम से प्रकाशित मेरी रचना "जीवन की बंजर भूमि में " लिंक ये थे => http://www.srijangatha.com/Permanent%20matter/vichar-withi.htm& http://www.srijangatha.com/2007-08/july07/vicharvithi.htm , हटा दिया है ।
संपादकीय कार्यालयः एफ-3, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, आवासीय कॉलोनी, रायपुर, 492001 ई-मेलः srijangatha@gmail.com,
चलते चलते इसे ज़रूर पढिए :-"सृजनगाथा : प्रसंगवश "
आप सभी इस दिशा में जागरूक रहिए,कहीं कोई........
शुभ रात्री
Thursday, February 21, 2008
साहित्यिक चोरी और हम सब
बी. बी. सी. उवाच
Wednesday, February 20, 2008
जीवन की बंजर भूमि में
आभास जबलपुर में
Saturday, February 9, 2008
upalabdh hain: बावरे फकीरा के वितरण अधिकार
संगीतकार: श्रेयस जोषी , गीतकार:गिरीश बिल्लोरे मुकुल
फोन:09424358167,09926471072,
MAIL: girishbillore@gmail.comFriday, February 8, 2008
सो कॉल्ड सोशल-वर्कर्स ज़रा :-"आशीष ठाकुर से सीखो !"
Thursday, February 7, 2008
" विधि आयोग ने भारत में लड़कों की शादी की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष
Tuesday, January 15, 2008
औरतें ...?

