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Tuesday, March 25, 2008

मेरे सुर में मेरे गीत

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Sunday, March 16, 2008

होली तो ससुराल

होली तो ससुराल की बाक़ी सब बेनूर सरहज मिश्री की डली,साला पिंड खजूर साला पिंड-खजूर,ससुर जी ऐंचकताने साली के अंदाज़ फोन पे लगे लुभाने कहें मुकुल कवि होली पे जनकपुर जाओ जीवन में इक बार,स्वर्ग का तुम सुख पाओ..!! ######### होली तो ससुराल की बाक़ी सब बेनूर न्योता पा हम पहुंच गए मन संग लंगूर, मन में संग लंगूर,लख साली की उमरिया मन में उठे विचार,संग लें नयी बंदरिया . कहत मुकुल कविराय नए कानून हैं आए दो होली में झौन्क, सोच जो ऐसी आए ...!! ######### होली तो ससुराल की ,बाक़ी सब बेनूर देवर रस के देवता, जेठ नशे में चूर , जेठ नशे में चूर जेठानी ठुमुक बंदरिया ननदी उम्र छुपाए कहे मोरी बाली उमरिया . कहें मुकुल कवि सास हमारी पहरेदारिन ससुर देव के दूत जे उनकी हैं पनिहारिन..!! ######### सुन प्रिय मन तो बावरा, कछु सोचे कछु गाए, इक-दूजे के रंग में हम-तुम अब रंग जाएं . हम-तुम अब रंग जाएं,फाग में साथ रहेंगे प्रीत रंग में भीग अबीरी फाग कहेंगे ..! कहें मुकुल कविराय होली घर में मनाओ मंहगे हैं त्यौहार इधर-उधर न जाओ !!

Monday, February 25, 2008

एक ख़त : पूर्णिमा वर्मन जी के नाम

http://abhivyakti-hindi.org/ <= लिंक पर उपलब्ध अभिव्यक्ति-अनुभूति की संपादिका को आज लिखे ख़त को सभी के लिए पोस्ट करना ज़रूरी है.....पूर्णिमा जी सादर अभिवादन आज ही जबलपुर में हिन्दी-साहित्य सम्मेलन जबलपुर जिला इकाई बैठक में आपकी चर्चा हुई। मो। मोइनुद्दीन "अतहर",प्रदीप"शशांक", सनातन बाजपेई जी,एवं श्री राम ठाकुर दादा आदि को प्राप्त सम्मान के लिए उन्हें शुभकामना देने का अवसर भी था , आज अभी-अभी अभिव्यक्ति पर छपी इस सूचना => "ये रचनाएँ मौलिक तथा अप्रकाशित होनी चाहिए। इन्हें किसी भी पत्र-पत्रिका, या वेब साइट अथवा ब्लॉग पर पहले प्रकाशित नहीं होना चाहिए। यदि बाद में यह पता चला कि रचना मौलिक नहीं थी या पहले प्रकाशित हो चुकी थी तो मानदेय की धनराशि का भुगतान रोका जा सकता है। यदि भुगतान कर देने के बाद इनके पूर्व प्रकाशित होने की जानकारी मिलती है तो भविष्य में उस कवि लेखक की रचनाओं का प्रकाशन अभिव्यक्ति व अनुभूति में हमेशा के लिए रोका जा सकता है।" के लिए आपके प्रति कृतज्ञ हूँ , आपकी इस पहल के बाद अन्य वेब-पत्रिकाएँ इसी तरह अलर्ट रहेगीं तो साहित्यिक-चौर्य-कर्म पर प्रतिबन्ध लगेगा। अंतर जाल पर साहित्य को लेकर भी आज बेहद प्रभावी चर्चा हुई बार बार आपका ज़िक्र सुन कर अच्छा लगा . शुभ कामनाओं के साथ गिरीश बिल्लोरे मुकुल प्रति, पूर्णिमा वर्मन, संपादक ,अभी-अनु, प्रतिलिपि:- वेब-पत्रिकाओं के संपादक गण

Friday, February 22, 2008

सत्य के साथ सृजनगाथा

तनवीर जी की पोस्ट हटाई सृजनगाथा ने

रायपुर से वेब पर प्रकाशित होने वाली सृजनगाथा के संपादक जी ने सत्यनिष्ठ होने का परिचय देकर साहित्य और न्याय का समर्तन किया और तनवीर जाफरी के नाम से प्रकाशित मेरी रचना "जीवन की बंजर भूमि में " लिंक ये थे => http://www.srijangatha.com/Permanent%20matter/vichar-withi.htm& http://www.srijangatha.com/2007-08/july07/vicharvithi.htm , हटा दिया है ।

संपादकीय कार्यालयः एफ-3, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, आवासीय कॉलोनी, रायपुर, 492001 ई-मेलः srijangatha@gmail.com,

चलते चलते इसे ज़रूर पढिए :-"सृजनगाथा : प्रसंगवश "

आप सभी इस दिशा में जागरूक रहिए,कहीं कोई........

शुभ रात्री

Saturday, February 9, 2008

upalabdh hain: बावरे फकीरा के वितरण अधिकार

अगर कोई म्यूजिक कम्पनी अपाहिज बच्चों की मदद के लिए बनाए गए इस "साई-भक्ति"एलबम के वितरण अधिकार खरीदना चाहे मेरा सौभाग्य होगा। यदि आभास जोषी ने इस एलबम को इस संकल्प के लिए कि "गरीब पोलियो ग्रस्त बच्चों की मदद की जाए " सोचकर अपने सुर दिए तो मैं नहीं समझता कि कोई और भी इस मामले में पीछे रहेगा।आप हमारे इस संकल्प में सहयोग कीजिए......हम प्रतीक्षा रत हें...... निवेदक

संगीतकार: श्रेयस जोषी , गीतकार:गिरीश बिल्लोरे मुकुल

फोन:09424358167,09926471072,

MAIL: girishbillore@gmail.com

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