A TRIBUTE TO SHIRDEE SAI BABADEVOTIONAL ALBUM "BAWARE FAQEERA" VOICE :- *ABHAS JOSHI {Mumbai/Jabalpur} *SANDEEPA PARE {Bhopal} MUSIC:- *SHREYASH JOSHI { Mumbai/Jabalpur } LYRICS:- *GIRISH BILLORE ;MUKUL (Jabalpur) FOR FURTHER DETAILS & YOUR SUGESSTIONS CONTACT [1] girishbillore@gmail.com [2] girish_billore@rediffmail.com [3] PHONE 09479756905 pl send crossed cheque of Rs.60/-(Rs.50 +Rs. 10/) for one CD to Savysachi Kala Group 969/A-2,Gate No.04 Jabalpur MADHY-PRADESH,INDIA
Sunday, April 27, 2008
बावरे फकीरा मेक
आशीष सक्सेना की मेहनत ,श्रेयस के संकल्प से
बावरे फकीरा पूरा हुआ
मुझे यकीन था कि आभास के सुर सह गायिका संदीपा पारे के सुरों का
साथ पाकर इस एलबम को जो ऊंचाई देंगे उसके लिए "बाबा के कृपा "
कहना ही शेष होगा,और हम कह भी क्या सकते हैं......!!
मुझे चिंता नहीं है आपका प्यार भी तो है हमारी साथ
गिरीश बिल्लोरे
Thursday, April 24, 2008
प्रतिभा और बाज़ार
Saturday, March 29, 2008
*KHAZANA*: "लाडली-लक्ष्मी"से बालिकाओं के लिए सोच बदली है...!!"#links#links#links#links#links#links
आभास आज 18 साल का हों गया है
Thursday, March 27, 2008
Tuesday, March 25, 2008
Sunday, March 23, 2008
उपयोग करके फैंकिए मत
आस का किसी ने जगाया था । उसने जीवन हर मोड़ पे नए नवेले मीठे-मीठे , खट्टे-खट्टे अनुभव की पोटली लेकर दिखाई दिया । वो सच्चा आदमी जब किसी का साथ देता तब डिफैन्सिव नहीं होता उसे अपना लक्ष्य स्पस्ट रूप से दिखाई दे रहा था। चलिए उस आदमी को नाम दे देतें हैं , उसका नाम आलू चमन था......अपना खून पसीना रामलाल को सफल करने में गिराता रहा । रामलाल अपनी जिन्दगी के साधारण स्तर से आजिज़ आ गया था , हर और आंशिक सफलता और क्विंटल भर असफलताएं लिए ख़ाक छानता । आलू चमन की मदद से आगे और आगे बढ़ता अब भूल गया लगता है रामलाल । ऐसे राम लालों की कमी कतई नहीं । इतने मकसद परस्तो,डिफेंसिव-खिलाडियों में कहीं आप तो नहीं यदि आप हैं तो आज कोशिश कीजिए उस मोटी कैंचुली से बाहर निकलनें की । शायद व्यावसायिकता के दौर से ,इंसानियत को बचा लाने में सफल होगें हम और आप
Sunday, March 16, 2008
होली तो ससुराल
आभार
स्पन्दन के लिए बेजी का कैसे आभार करें
नौ महीने गर्भ में आरंभ वात्सल्य ये सभी पोस्ट काबिले सम्मान हैं...
आभार
Thursday, March 6, 2008
महिला दिवस पर एक चिंतन "चिंता नहीं चिंतन की ज़रूरत है"
सुनीता शानू जी.....ने.....महिला दिवस पर एक सामयिक रचना ......ब्लाग पर पोस्ट की है एक क्लिक कीजिए कविता केलिए मै और तुम उनके ब्लोंग पर यहाँ क्लिक करके देखिए "मन पखेरू फ़िर उड़ चला"
Saturday, March 1, 2008
रामकृष्ण गौतम
Thursday, February 28, 2008
मध्य-प्रदेश लेखक संघ ने प्रस्ताव आहूत किए
- अक्षर-आदित्य-सम्मान, आयु-सीमा ६० वर्ष,
- पुष्कर-सम्मान,६० वर्ष तक की आयु सीमा
- देवकी-नंदन-सम्मान,३५-५० , आयु वर्ग के रचनाकारों के लिए,
- काशी-बाई-मेहता-सम्मान,किसी भी आयु की महिला लेखिका,के लिए,
- कस्तूरी देवी चतुर्वेदी,लोक-भाषा-सम्मान,म०प्र० की लोक भाषा, की महिला साहित्यकार को , योग्य प्रस्ताव के अभाव में पुरुष साहित्यकार के नाम पर विचार किया जाएगा ,
- माणिक वर्मा,व्यंग्य-सम्मान,
- चंद्रप्रकाश जायसवाल,बाल-साहित्य-सम्मान,
- पार्वती देवी मेहता अहिन्दी भाषी हिन्दी-साहित्यकार
- डा० संतोष कुमार तिवारी -समीक्षा सम्मान, ६० वर्ष आयु से अधिक आयु के समीक्षक को , शिथिलाताएं संभावित
- हरिओम शरण चौबे गीतकार सम्मान,
- कमला देवी लेखिका सम्मान
- मालती वसंत सम्मान [द्वि-वार्षिक ] १८ वर्ष आयु वर्ग की युवा लेखिका को
- सारस्वत-सम्मान,
- अमित रमेश शर्मा हास्य-व्यंग्य के लिए
प्रस्ताव के लिए म०प्र० के साहित्यकार,जिला एकांशों के पदाधिकारियों से सम्पर्क कर सकते हैं । अथवा निम्न लिखित पतों पर सम्पर्क
कीजिए:-
- श्री बटुक-चतुर्वेदी ,१४/८,परी-बाज़ार,शाहाज़हानाबाद, भोपाल,म०प्र०
- गिरीश बिल्लोरे मुकुल एकांश अध्यक्ष , जबलपुर ,एकांश,९६९/ए-२,गेट न० ०४, जबलपुर
[ क्रमांक २ से केवल प्रस्ताव हेतु प्रपत्र -प्राप्ति हेतु सम्पर्क कीजिए]
Wednesday, February 27, 2008
Monday, February 25, 2008
एक ख़त : पूर्णिमा वर्मन जी के नाम
Sunday, February 24, 2008
किसी रंजिश को हवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी !!
Feb 21, 05:05 pm
फिरोजपुर [जागरण संवाददाता]। ंवो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी.. हे राम. व आदमी आदमी को क्या देगा जो भी देगा खुदा देगा.. जैसी कालजयी गजलें लिखने वाले मशहूर शायर सुदर्शन फाकिर सोमवार को इस दुनिया से रुखसत हो लिए। अफसोस कि पंजाब को एक अलग पहचान देने वाले इस शख्स को पंजाबियों और पंजाब ने नहीं पहचाना।
वर्ष 1937 में फिरोजपुर के गुरुहरसहाय कस्बे के रत्ताखेड़ा गांव में डाक्टर बिहारी लाल कामरा के यहां जन्म लेने वाले सुदर्शन फाकिर के परिवार में दो अन्य भाई भी थे। बड़े भाई का देहांत हो चुका है। जालंधर में रहने वाले छोटे भाई विनोद कामरा के यहां फाकिर साहब ने जिंदगी के आखिरी लम्हे बिताए।
फाकिर साहब के अजीज मित्रों कहना है कि उनकी याददाश्त काफी तेज थी। जिस शख्स से वह मिल लेते थे, उसे दोबारा अपना नाम नहीं बताना पड़ता था। यह अलग बात है कि फाकिर साहब को उनके घर का पता कभी याद नहीं रहा। वर्ष 1970 से पहले जालंधर में आल इंडिया रेडियो में नौकरी करने वाले फाकिर साहब को वहां मन नहीं लगा। उन्होंने नौकरी छोड़ दी और मुंबई चले आए। 2005 में वह मुंबई से वापस आकर जालंधर में अपने छोटे भाई के यहां रहने लगे। सत्तर के करीब गजल लिखने वाले फाकिर की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन दिनों बेगम अख्तर सिर्फ पाकिस्तान के शायरों की गजल ही गाया करती थीं। मगर, फाकिर साहब पहले भारतीय शायर हैं, जिनकी लिखी गजल बेगम अख्तर ने बुलाकर ली और अपनी आवाज दी। वह मशहूर गजल थी 'इश्क में गैरते जज्बात नेरोने न दिया..'। बाद में चित्रा सिंह ने भी इसे गाया था।
मोहम्मद रफी ने उनकी गजल 'फलसफे इश्क में पेश आए हैं सवालों की तरह..' गाकर दुनिया में धूम मचा दी। इस नज्म ने फाकिर को नई पहचान दी। जब गजल गायक जगजीत सिंह ने उनके द्वारा लिखी गजल 'वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी.' गाया उसके बाद फाकिर केनाम का डंका दुनिया में ऐसा गूंजा कि उसकी खनक आज भी सुनाई देती है। उनके द्वारा लिखित गजल 'जिंदगी मेरे घर आना..' गाकर भूपिंदर सिंह ने फिल्म फेयर अवार्ड जीता। वहीं गुलाम अली ने 'कैसे लिखोगे मोहब्बत की किताब तुम तो करने लगे पल-पल का हिसाब..' गाकर गजलों के इस सम्राट को सलाम किया था। फाकिर का अंतिम शेर जो दुनिया के सामने नहीं आ सका, वह था 'लाश मासूम की हो या कि कातिल की, जनाब हमने अफसोस किया है..'। वर्ष 1982 में गजल की एक कैसेट रिलीज की गई थी, उसमें मीरा व कबीर के सात भजन थे और आठवां भजन फाकिर साहब ने लिखा था। वहीं फाकिर साहिब का एक गीत 'आखिर तुम्हें आना है जरा देर लगेगी..' भी काफी पसंद किया गया था। इसका बालीवुड फिल्म यलगार के लिए इस्तेमाल किया गया था। http://in.jagran.yahoo.com/news/national/general/5_1_4198016/ पर सम्पूर्ण समाचार उपलब्ध है। हिंद-युग्म के राजीव रंजन,शैलेश जी , फाकिर साहब के जीवन और उनको सूचना संसार से उपेक्षित रहने को लेकर दु:खी हें
जिन्दगी से बात करतीं गजल,जिन्दगी की बात करती ग़ज़ल, और जब सुदर्शन जी की शायरी ,बेगम अख्तर की आवाज़ के रथ पे सवार लगती कोई साम्राज्ञी की शोभा यात्रा हो, नए दौर में जगजीत सिंह के स्वरों के जारी हमारे कानों से सीधे दिल मी उतर वहीं बस गयी लगती फाकिर साहब की गज़लें.
यूनुस खान ने बताया की सुदर्शन फाकिर इंटरव्यू, आत्म प्रकाशन जैसी बातों से दूर ही रहतें थे .
एक गंभीर शायर जो आम बोल चाल के शब्दों को ग़ज़ल में आसानी से बदल देने वाले सुदर्शन फाकिर नहीं रहे वो बात कैसे लाते थे सादगी अपने कलाम में सुदर्शन फाकिर इस बात को समझने के लिए अब केवल हमको निर्भर रहना होगा उनकी रचनाओं पर
किसी रंजिश को हवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी मुझ को एहसास दिला दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी
मेरे रुकने से मेरी साँसे भी रुक जायेंगी फ़ासले और बड़ा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी
ज़हर पीने की तो आदत थी ज़मानेवालो अब कोई और दवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी
चलती राहों में यूँ ही आँख लगी है 'फ़ाकिर' भीड़ लोगों की हटा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी
v सुदर्शन फ़ाकिर की रचनाएँ
आदमी आदमी को क्या देगा
आज के दौर में ऐ दोस्त
आज तुम से बिछड़ रहा हूँ
अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें
अहल-ए-उल्फ़त के हवालों पे
चराग़-ओ-आफ़ताब ग़ुम
ढल गया आफ़ताब ऐ साक़ी
दिल के दीवार-ओ-दर पे क्या देखा
दुनिया से वफ़ा करके
फ़ल्सफ़े इश्क़ में पेश आये
ग़म बढ़े आते हैं
हम तो यूँ अपनी ज़िन्दगी से मिले
इश्क़ में ग़ैरत-ए-जज़्बात
जब भी तन्हाई से घबरा के
जिस मोड़ पर किये थे
किसी रंजिश को हवा दो
कुछ तो दुनिया की इनायात
मेरे दुख की कोई दवा न करो
मेरी ज़ुबाँ से मेरी दास्ताँ
पत्थर के ख़ुदा पत्थर के सनम
फिर आज मुझे तुम को
सामने है जो उसे लोग बुरा कहते हैं
शायद मैं ज़िन्दगी की सहर
शैख़ जी थोड़ी सी पीकर आइये
उल्फ़त का जब किसी ने
उस मोड़ से शुरू करें
ये दौलत भी ले लो
ये शीशे ये सपने
ज़ख़्म जो आप की इनायत है
ज़िन्दगी तुझ को जिया है
वो काग़ज़ की कश्ती
दिल तोड़ दिया
पत्थर के ख़ुदा
गिरीश बिल्लोरे "मुकुल"
9424358167
girishbillore@gmail.com
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