मित्र ............जी सादर अभिवादन आपका ख़त मिला . मेरी सेहत ठीक है कोई बुखार ताप नहीं है मज़ा आ गया . ख़त का मज़मून और लिफाफा भा गया बिना प्रयास के मेरा नाम विवादों के आकाश में छा गया नाम तो हुआ मेरा भी मेरे शहर का भी सच्चे सहज प्रयासों को धक्का लगा कर आप ने जो कोशिश की उससे मुझे और हिम्मत मिली मित्र ने मित्र का फ़र्ज़ निबाहा अच्छा लगा. इस शहर में कईयों ने ये भोगा है ऐसी-मित्रता का दंश । इन कईयों को उस पशु कि श्रेणी में रखा जाना चाहिए जिसे एक ख़ास प्रजाति का प्राणी कोसता है। उस पशु का तब तक कुछ नहीं होता जब तक की उसकी वय-पूर्ण नहीं होती।
