Showing posts with label ईमानदारी. Show all posts
Showing posts with label ईमानदारी. Show all posts

Thursday, January 29, 2009

"खुला ख़त :संकीर्ण विचारों वाले न बांचें ?

मित्र ............जी सादर अभिवादन आपका ख़त मिला . मेरी सेहत ठीक है कोई बुखार ताप नहीं है मज़ा आ गया . ख़त का मज़मून और लिफाफा भा गया बिना प्रयास के मेरा नाम विवादों के आकाश में छा गया नाम तो हुआ मेरा भी मेरे शहर का भी सच्चे सहज प्रयासों को धक्का लगा कर आप ने जो कोशिश की उससे मुझे और हिम्मत मिली मित्र ने मित्र का फ़र्ज़ निबाहा अच्छा लगा. इस शहर में कईयों ने ये भोगा है ऐसी-मित्रता का दंश । इन कईयों को उस पशु कि श्रेणी में रखा जाना चाहिए जिसे एक ख़ास प्रजाति का प्राणी कोसता है। उस पशु का तब तक कुछ नहीं होता जब तक की उसकी वय-पूर्ण नहीं होती।

****************************
हमारी एक मित्र सहकर्मीं हैं सर-ओ-पा ईमानदार मानतीं हैं ख़ुद को ।उनकी इमानदारी का चिंतन सभी को अच्छा लगता रहा किंतु एक बार जब स्नेह वश उनसे एक पिकनिक पार्टी की व्यवस्था एवं आयोजन का अनुरोध किया तो वे कह उठीं :-"भाई,तनखा के बूते यह सम्भव नहीं है अपने बच्चे पालने हैं हमें ..." सच सहजता स्नेह वश अनुरोध करनें ओर सुनाने वाले धारा शाही हो गए । उनको लगा की श्रीमती क अपनी तथा कथित ईमानदारी का उल्लेख नहीं शेष सभी को बेईमान साबित कर रहीं हैं ।

Followers