Friday, August 22, 2008

मोहित

अन्नू कपूर मोहित हुए आभास के अन्दर की सरस्वती को किया प्रणाम, एन डी टी वी इमेजिन पर चल रहे रियलिटी शो जुनून में इस बार जो हुआ वो किसी शो में नहीं हुआ [एडिटेड समाचार के लिए क्लिक कीजिये लिंक पर ] हमें आभास पर विश्वास तो पूरा है कि

अन्नू कपूर मोहित हुए आभास के अन्दर की सरस्वती को किया प्रणाम

आभास पे फ़िदा हुए अन्नू कपूर आभास की प्रतिभा की दीवानगी का हर तरफ़ असर दिखाई देता है. एन डी टी वी इमेजिन के बेहतरीन म्यूजिकल शो जुनून के आने वाले शो में सबसे मार्मिक और भावुक कर देने वाला दृश्य होगा आभास और अन्नू कपूर के बीच सम्मान और सराहना का आदान प्रदान बेहद भावुक किंतु संगीत के लिए प्रतिबद्ध एंकर अन्नू ने आभास की परफोर्मेंस के बाद बेहद अनोखे तरीके से की तारीफ़ जिससे प्रभावित हो आभास ने इस हस्ती के पाँव छू लिए . इस बात से बेखबर सभी आभास की प्रस्तुति और विनम्रता पे मोहित थे की अन्नू कपूर ने आभास के पाँव छुऐ..........!इस बात का आभास न तो आभास को था और न ही आडिएंस को , जजेज भी हतप्रभ हुए और अन्नू जी की ऊंचाई को ताकते रह गए सभी . की अन्नू जी ने कहा:-"बेटे,इस ग़लत फहमी में मत रहना की मैंने तुम्हें प्रणाम किया मैंने तो तुममे बसी माँ सरस्वती को प्रणाम किया है"अन्नू कपूर की ऊंचाई को नापना सबके बस में नही तभी तो यह घटना और अन्नू कपूर का कथन सबके लिए प्रेरक प्रसंग सी बन गया है .

Tuesday, August 19, 2008

क्लिक-सलाम:विश्व छायांकन दिवस पर विशेष

जबलपुर का छायांकन में योगदान उच्च स्तरीय रहा है । फोटोग्राफी ,के पुरोधाओं में शशिन यादव जी,का नाम जहाँ एक ओर बड़े सम्मान से लिया जाता है वहीं युवा छायाकारों को भी जबलपुर नहीं बसरता क्या करें इस शहर की तासीर ही ऐसी ही है। जबलपुर में फोटो पत्रकारिता के बीते दौर में जिनका नाम शिखर पर था उनमें शशिन यादव जी के अलावा कामता-सागर,जे० एस० मूर्ति,दिलीप घोष, स्वर्गीय महेंद्र चौधरी,आर० खान,नितिन पोपट,का दौर आया । इनमें दिलीप घोष जे एस मूर्ति को छोड़ सभी सीधे तौर पर अखबारी फोटोग्राफी से जुड़े थे। ब्लेक एंड व्हाइट दौर में रंगीन फोटो रोल मुंबई में साफ़ होते थे स्थानीय अखबार की ज़रूरत पूरी कराने ये छायाकार बड़ी मेहनत से प्रोग्राम के अन्तिम क्षण तक रुकते और तुंरत स्टूडियो में जा कर डेवलप करते तब तक ढेरों फोन आ चुके होते थे सम्पादकों के ।
काम मेन्यूअल होने से थोडा विलंब तो हो ही जाता था । साथ आने जाने के साधन के नाम पे थी सायकलें या किन्हीं के पास स्कूटरें, वरना रिक्सा क्या बुरा था जो आज भी मेरे शहर की पहचान है।इन पुरोधाओं के बाद दौर आया सुगन जाट,पप्पू शर्मा,रजनी कान्त यादव,अरविन्द यादव,बसंत मिश्रा,संजीव चौधरी,संतराम चौधरी,अनिल तिवारी,-आफ़रोज खान,महिला छायाकारों में विजया परांजपे ,और ............श्रीवास्तव थीं जो ज़्यादातर नारी निकुंज {नवीन दुनिया जबलपुर का सर्वाधिक लोकप्रिय परिशिश्ठ }के लिए काम करतीं थीं किंतु केवल स्वांत:सुखाय ।आज के दौर में संजय राठौर,राजेश मालवीय,जापानी,उमेश राठौर,वीरेन्द्र राजपूत,के०के०, संजय पशीने,शंकर विश्वकर्मा, सहित सारे वो जो प्रतिबद्ध हैं फोटो ग्राफी के लिए..... सबको मेरा क्लिक सलाम

Monday, June 2, 2008

:-"ख़ुद से कैसे भाग सकेगा अंतस

:-"ख़ुद से कैसे भाग सकेगा अंतस पहरेदार कड़क हैं" इस मुखड़े पे गीत लिख भेजिए अन्तिम तिथि 30 जून 2008 email:- girishbillore@gmail.com अथवा girishbillore@hotmail.com नियमों की प्रतीक्षा कीजिए मुझे आपके एक गीत की प्रतीक्षा है अन्तिम तिथि तक प्राप्त गीत प्रकाशित कर दिए जाएंगे प्रकाशित गीतों पर विशेषज्ञों की राय,(गुणांक),तथा पाठकों की राय (गुणांक) के आधार पर विजेताओं की घोषणा कर दी जावेगी ! पुरूस्कार राशी के रूप में न होकर "...........................!" के रूप में होगा !!

Saturday, May 3, 2008

कुछ तो शर्म करिए

आभास के आने की ख़बर मिली, भोपाल के रास्ते आ रहे आभास को की नानी के देहावसान की ख़बर मिली , नानी जी की अन्तिम यात्रा में शामिल हुए आभास के बाल मन पर गहरा अंतर्द्वंद चल रहा था। अश्रु थे कि रुक नहीं पा रहे थे , तभी इक प्रसंशक ने आभास की और इक जेबी डायरी बढा दी ऑटोग्राफ के लिए। आभास भौंचक था । प्रसंशकों कुछ तो..........?

Sunday, April 27, 2008

बावरे-फकीरा "BAWARE FAQEERA": बावरे फकीरा मेक

बावरे फकीरा मेक

बावरे फकीरा मेक

आशीष सक्सेना की मेहनत ,श्रेयस के संकल्प से

बावरे फकीरा पूरा हुआ

मुझे यकीन था कि आभास के सुर सह गायिका संदीपा पारे के सुरों का

साथ पाकर इस एलबम को जो ऊंचाई देंगे उसके लिए "बाबा के कृपा "

कहना ही शेष होगा,और हम कह भी क्या सकते हैं......!!

मुझे चिंता नहीं है आपका प्यार भी तो है हमारी साथ

गिरीश बिल्लोरे

Thursday, April 24, 2008

आभास को शोकाकुल है

आभास जोशी की नानी का देहावसान २३/०४/०८ को प्रात: ६:०० बजे भोपाल में हो गया, संवेदनाएं

प्रतिभा और बाज़ार

[01] प्रतिभा और बाज़ार उसकी सफलता की कहानी में केवल उसका टेलेंट ही था...? ये अर्ध सत्य इस कारण भी क्योंकि बाज़ारवाद में ये सब कुछ होता है तरक्की और विकास के शब्द सिर्फ़ व्यवसायिकता के पन्नों पे दिखाई देतें हैं । रोशनी को सलाम करता ये समय तिमिर को नहीं पूछ रहा होता है। मेरी, आपकी, यानी हम सबकी नज़र के इर्द गिर्द हजारों हज़ार प्रतिभाएं बेदम दिखाईं देतीं है ,किंतु केवल वो ही सफल होती है जो ग्लैमरस हो.यानी व्यवसायिकता के लिए मिसफिट न हो । माँ-बाप की तस्वीरें घर के बैठक खानों से लापता है,तो पूजा घर में होगी...? नहीं घर के नक्शे में पूजा घर के लायक जगह थी ही नहीं....सो बन नहीं पाया पूजा घर । जैसे ही मेरी नज़र गयी दीवार पर इक मँहगी पेंटिंग जो न तो भाई साहब के पिताजी की थी और न ही माँ की तस्वीर थी वो, इसका अर्थ ये नहीं की उनके मन में माँ - बाप के लिए ज़गह नहीं है बात दरअसल ये है कि हमारी इन महाशय पर व्यावसायिकता इस कदर हावी हुई है कि वो सब कुछ भूल गए बच्चो से भी तो कम ही मिल पातें हैं वे तो दिवंगतों को याद रखना कैसे सम्भव होगा । विष्यान्तर होने के लिए माफी चाहता हूँ ,वास्तव में जिन श्रीमान की मैं चर्चा कर रहा हूँ वे बेहतरीन चित्रकार थे, तूलिकाएं,रंग,केनवस् उनके इशारे पे चलते थे,अब ..... वो प्रतिभा गुमसुम सी है, केनवस् कलम रंग को छुए बरसों बीत गए। केवल व्यापारिक-दक्षता ही उपयोगी साबित हुई उनके जीवन के लिए । पेंसिल से चित्रकारी करते लोगों की तारीफ करनी होगी,जो व्यावसायिकता के दौर में आज भी प्रतिभा को ज़िंदा रखतें हैं । ब्लॉगर के रूप सही,कला को ज़िंदा रखना ही होगा अस भी बस भी....! अखबार,पत्रिकाएँ,विज्ञापनजीवी संचार माध्यमों के माथे दोष मढ़्ना ग़लत होगा समय ही ऐसा है कि कला साहित्य के पन्ने कम होते जा रहे हैं।

Saturday, March 29, 2008

*KHAZANA*: "लाडली-लक्ष्मी"से बालिकाओं के लिए सोच बदली है...!!"#links#links#links#links#links#links

*KHAZANA*: "लाडली-लक्ष्मी"से बालिकाओं के लिए सोच बदली है..!

आभास आज 18 साल का हों गया है

आभास को जन्म दिन की हार्दिक बधाइयां " भावों की सलाई लेकर हम शब्द बुने तुम सुर देना *********************** जीवन के सफर में मैंने भी कुछ सपन बुनें तुमको लेकर . कुछ स्वपन मेरे थे मुक्त गीत कुछ सपनों के तीखे तेवर ..? मन की पीडा जब गीत बने श्रेयस होगा तुम सुर देना ...!! ************************* आभास मुझे था जीवन में कुछ ऐसा हम कर जाएंगे देंगें इक मुट्ठी दान कभी भर-भर के झोली पाएँगें ..! जब मन इतराए बादल सा तुम सावन का रिम झिम सुर देना !! ************************** " आभास को जन्म दिन की हार्दिक बधाइयां " गिरीश चचा,सतीश हरीश,अंकुर,सोनू,श्रद्धा, चिन्मय,आस्था,अनुभा,शिवानी, एवं काशीनाथ बिल्लोरे एवं समस्त बिल्लोरे परिवार जबलपुर, के साथ बावरे फकीरा टीम,सुदर्शन परिवार,मनीष शर्मा,माधव सिंह यादव,

Sunday, March 23, 2008

उपयोग करके फैंकिए मत

आस का किसी ने जगाया था । उसने जीवन हर मोड़ पे नए नवेले मीठे-मीठे , खट्टे-खट्टे अनुभव की पोटली लेकर दिखाई दिया । वो सच्चा आदमी जब किसी का साथ देता तब डिफैन्सिव नहीं होता उसे अपना लक्ष्य स्पस्ट रूप से दिखाई दे रहा था। चलिए उस आदमी को नाम दे देतें हैं , उसका नाम आलू चमन था......अपना खून पसीना रामलाल को सफल करने में गिराता रहा । रामलाल अपनी जिन्दगी के साधारण स्तर से आजिज़ आ गया था , हर और आंशिक सफलता और क्विंटल भर असफलताएं लिए ख़ाक छानता । आलू चमन की मदद से आगे और आगे बढ़ता अब भूल गया लगता है रामलाल । ऐसे राम लालों की कमी कतई नहीं । इतने मकसद परस्तो,डिफेंसिव-खिलाडियों में कहीं आप तो नहीं यदि आप हैं तो आज कोशिश कीजिए उस मोटी कैंचुली से बाहर निकलनें की । शायद व्यावसायिकता के दौर से ,इंसानियत को बचा लाने में सफल होगें हम और आप

Sunday, March 16, 2008

होली तो ससुराल

होली तो ससुराल की बाक़ी सब बेनूर सरहज मिश्री की डली,साला पिंड खजूर साला पिंड-खजूर,ससुर जी ऐंचकताने साली के अंदाज़ फोन पे लगे लुभाने कहें मुकुल कवि होली पे जनकपुर जाओ जीवन में इक बार,स्वर्ग का तुम सुख पाओ..!! ######### होली तो ससुराल की बाक़ी सब बेनूर न्योता पा हम पहुंच गए मन संग लंगूर, मन में संग लंगूर,लख साली की उमरिया मन में उठे विचार,संग लें नयी बंदरिया . कहत मुकुल कविराय नए कानून हैं आए दो होली में झौन्क, सोच जो ऐसी आए ...!! ######### होली तो ससुराल की ,बाक़ी सब बेनूर देवर रस के देवता, जेठ नशे में चूर , जेठ नशे में चूर जेठानी ठुमुक बंदरिया ननदी उम्र छुपाए कहे मोरी बाली उमरिया . कहें मुकुल कवि सास हमारी पहरेदारिन ससुर देव के दूत जे उनकी हैं पनिहारिन..!! ######### सुन प्रिय मन तो बावरा, कछु सोचे कछु गाए, इक-दूजे के रंग में हम-तुम अब रंग जाएं . हम-तुम अब रंग जाएं,फाग में साथ रहेंगे प्रीत रंग में भीग अबीरी फाग कहेंगे ..! कहें मुकुल कविराय होली घर में मनाओ मंहगे हैं त्यौहार इधर-उधर न जाओ !!

आभार

स्पन्दन के लिए बेजी का कैसे आभार करें

नौ महीने गर्भ में आरंभ वात्सल्य ये सभी पोस्ट काबिले सम्मान हैं...

आभार

Thursday, March 6, 2008

महिला दिवस पर एक चिंतन "चिंता नहीं चिंतन की ज़रूरत है"

महिला सशक्तिकरण की चिंता करना और समाज के समग्र विकास में महिलाओं की हिस्सेदारी पर चिंतन करना दो अलग-अलग बिन्दु हैं ऐसा सोचना बिलकुल गलत है । लिंग-भेद भारतीय परिवेश में मध्य-कालीन देन है किन्तु अब तो परिस्थितियाँ बदल रहीं है किन्तु बदलती तासीर में भी महिला वस्तु और अन्य वस्तुओं के विक्रय का साधन बन गयी है. अमूल माचो जैसे विज्ञापन इसके ताज़ा तरीन उदाहरण हैं .क्या विकास के इस फलक पर केवल विज्ञापन ही महिलाओं के लिए एक मात्र ज़गह है...? ऑफिस में सेक्रेटरी,क्लर्क,स्टेनो,स्कूलों में टीचर,बस या इससे आगे भी-"आकाश हैं उनके लिए॥?"हैं तो किन्तु यहाँ सभी को उनकी काबिलियत पे शक होता है .होने का कारण भी है जो औरतैं स्वयम ही प्रदर्शित करतीं हैं जैसे अपने आप को "औरत" घोषित करना यानी प्रिवलेज लेने की तैयारी कि हम महिला हैं अत:...हमको ये हासिल हों हमारा वो हक है , .... जैसा हर समूह करता है।.....बल्कि ये सोच होनी चाहिए कि हम महिलाएं इधर भी सक्षम हैं...उस काम में भी फिट...! यहाँ मेरा सीधा सपाट अर्थ ये है की आप महिला हैं इसका एहसास मत .होने दीजिए ...सामाजिक तौर पे स्वयम को कमजोर मत सिद्ध करिए ... वरन ये कहो की-" विकास में में समान भागीदार हिस्सा हूँ.....!" दरअसल परिवार औरतों को जन्म से औरत होने का आभास कराते हैं घुट्टी के संस्कार सहजता से नहीं जाते ।आगे जाते-जाते ये संस्कार पुख्ता हो जातें हैं।मसला कुल जमा ये है कि महिला के प्रति हमारी सोच को सही दिशा की ज़रूरत है...वो सही दिशा है समग्र विकास के हिस्से के तौर पर महिला और पुरुष को रखने की कोशिश की जाए॥

सुनीता शानू जी.....ने.....महिला दिवस पर एक सामयिक रचना ......ब्लाग पर पोस्ट की है एक क्लिक कीजिए कविता केलिए मै और तुम उनके ब्लोंग पर यहाँ क्लिक करके देखिए "मन पखेरू फ़िर उड़ चला"

Saturday, March 1, 2008

रामकृष्ण गौतम

http://www.koitohoga.blogspot.com/ JABALPUR /ஜபல்பூர் /ಜಬಲ್ಪುರ್ /Jఅబల్పూర్ यानी अपने जबलैपुर या जबल+ई+पुर के रामकृष्ण गौतम का ब्लॉग "Least but not the Last_ _ _! ! !" देखने लायक तो है ही बेहतरीन भी है...... !! बधाइयां

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