Thursday, January 29, 2009

"खुला ख़त :संकीर्ण विचारों वाले न बांचें ?

मित्र ............जी सादर अभिवादन आपका ख़त मिला . मेरी सेहत ठीक है कोई बुखार ताप नहीं है मज़ा आ गया . ख़त का मज़मून और लिफाफा भा गया बिना प्रयास के मेरा नाम विवादों के आकाश में छा गया नाम तो हुआ मेरा भी मेरे शहर का भी सच्चे सहज प्रयासों को धक्का लगा कर आप ने जो कोशिश की उससे मुझे और हिम्मत मिली मित्र ने मित्र का फ़र्ज़ निबाहा अच्छा लगा. इस शहर में कईयों ने ये भोगा है ऐसी-मित्रता का दंश । इन कईयों को उस पशु कि श्रेणी में रखा जाना चाहिए जिसे एक ख़ास प्रजाति का प्राणी कोसता है। उस पशु का तब तक कुछ नहीं होता जब तक की उसकी वय-पूर्ण नहीं होती।

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हमारी एक मित्र सहकर्मीं हैं सर--पा ईमानदार मानतीं हैं ख़ुद को ।उनकी इमानदारी का चिंतन सभी को अच्छा लगता रहा किंतु एक बार जब स्नेह वश उनसे एक पिकनिक पार्टी की व्यवस्था एवं आयोजन का अनुरोध किया तो वे कह उठीं :-"भाई,तनखा के बूते यह सम्भव नहीं है अपने बच्चे पालने हैं हमें ..." सच सहजता स्नेह वश अनुरोध करनें ओर सुनाने वाले धारा शाही हो गए । उनको लगा की श्रीमती क अपनी तथा कथित ईमानदारी का उल्लेख नहीं शेष सभी को बेईमान साबित कर रहीं हैं

4 comments:

अनूप शुक्ल said...

क्या बात है!

गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" said...

Jai Gurudev
dahnyvad padharne ka...

समयचक्र - महेद्र मिश्रा said...

billoure ji.
मै निस्वार्थ भाव से विगत ढाई सालो से ब्लागिंग कर रहा हूँ और मेरा खासकर यहाँ के ब्लागरो से कोई लेना देना नही रहा है और मुझे दूसरो शहरों के ब्लॉगर भाई बहिनों का लगातार स्नेह प्राप्त हो रहा है परन्तु अपने जिस तरह से मुझे और नागफनी को बधाई दी है यह मेरे लिए नागवार गुजरा है और आपने प्रथम वार कर मेरी छबी को ब्लॉगर जगत के सामने धूमिल करने की कोशिश की है . याद रखे नागफनी के कांटे जब चुभते है तो दर्द होता है . आप मुझे नागफनी या नागमणि भी कह ले तो मुझे कोई बुराई नही है पर ये समझ ले की नागफनी के कांटे और नागमणि का जहर तेज होता है . याद रखे यदि कोई मेरी और पहली उंगली उठाएगा तो जबाब जरुर दिया जाएगा चाहे वह कोई भी हो . जिस कलम में धार हो वह मैदाने जंग में अजमा सकता है . मै भी एक इसे परिवार से जुड़ा हूँ जो हमेशा कलम के लिए समर्पित रहा है और रहेगा आप जैसो की मै परवाह नही करता . अपेक्षा है की आप मेरे ब्लॉग पर न आए तो अच्छा है . मै भी इसी शहर से जुड़ा हूँ और सभी के पिछले इतिहास के बारे में अच्छी तरह से जनता हूँ . आपने जो खेमबजी और गुटबाजी की बात की थी वो मेरे पास मोबाइल में रिकार्ड है कहे तो उसकी आडियो जारी कर दूँ

गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" said...

आपने जो खेमबजी और गुटबाजी की बात की थी वो मेरे पास मोबाइल में रिकार्ड है कहे तो उसकी आडियो जारी कर दूँ
AP SWATANTR BHARAT KE SWATANTR NAGARIK HAI JO CHAHE JAB CHAHE KARIYE MAIN APAKO ROKANE KYON CHALAA