Sunday, January 18, 2009

सौतन - सौ तन हो गयी,सत्यम शिवम् संजोग

मन मोहन संग रास-रस,अंग-अंग सकुचाय !अनुभव मत पूछो सखि ,मोसे कहो नै जाय !! देखूं तो प्रिय के नयन,सुनूं तो प्रिय के गीत ! हिय हारी मैं तुम कहो, तभी तो मोरी जीत !! मैं प्रियतम की बावरी,प्रीत रंग चहुँ ओर ! आई मधु ऋतु ,देने पीर अछोर !! आज मिलन की यामिनी,मणि-कंचन संजोग सौतन - सौ तन हो गयी,सत्यम शिवम् संजोग