Wednesday, December 3, 2008

इमरान खान वाला विज्ञापन ...........!

"" राजीव सारस्वत को भाव पूर्ण श्रद्धांजलियां " भारत के लोग आँसू क्रोध वितृष्णा से भर गया है। उधर से ख़बर आ रही है की पड़ोसी ने सहयोग से इनकार कर दिया है । कोई चिंता न की जाए ....... बस अब भारत कठोर हो जाए। आसिफ अली ज़रदारी का बयान आ ही गया है "कि पाक का हाथ नहीं "न ही पकडा गया आतंकी पाकी है । इस झूठ का क्या करें ? यदि विश्व समुदाय इस देश की [पाकिस्तान की] इस अदा से वाकिफ है ..जबकी भारत में हुई इस हरकत में पाकिस्तानी सहभागिता स्पष्ट है सबूत हैं भारत के पास .. इस पर लाइव इंडिया से बातचीत में शहीद अली जियो टी वी ने भी उनके सुर में सुर मिलाया कि आम भारतीय जानता कि सरकारें किसी आतंकवाद को सीधे प्रोत्साहन की नहीं देता किंतु आतंकी-केम्पों को न रोकना एक खामोश सहमति का संदेश अवश्य है भारत की विशाल सोच का ग़लत अर्थ निकालता पड़ोसी देश । ऐसी स्थिति में भारत को बिना समय गंवाए उन बीस आतंकवादियों के भारत भेजने की की अपील सप्रमाण विश्व समुदाय के समक्ष पेश कर देनी चाहिए । इस क्रम में ज्ञात हुआ कि भारत अमेरिकन प्रतिनिधि आयीं,हैं देखतें हैं कोंडोलिज़ा राईस क्या संदेश देतीं है अपने महामहिम को । rizwana ने hi5 पर मुझे भेजे संदेश में बताया कि :-धन्यवाद , मै सामायिक हालात पे बेहद निडरता एक डॉक्युमेंटरी बनाए जा रही हूँ ...बोहोत अभ्यासपूर्ण ..कहीं भी चूक नही सकती हर ओरसे सहयोग की दरख्वास्त है ॥ "रिज़वाना आप ये कर रहीं हैं इस का शुक्रिया " उधर पत्रकार सईद नकवी साहब ने खुले तौर पर डिप्लोमेटिक रास्ते सुझाए आतंकवाद के विरुद्ध संवादों के अनुशासन की सलाह दी, वे सहज भावः से कह गए कि कारर्वाई के लिए 27 नवम्बर कि तिथि अनुकूल थी यानी कहीं न कहीं देश को पड़ोसी के लिए अपनी सोच का पुनरीक्षण करना चाहिए । और अब एक सांकेतिक ख़त प्रिय बंधू ............ जी वंदे-मातरम "हम भारतीय प्रजातान्त्रिक स्वरुप पर सादर नत मस्तक और विनम्र हैं अगर हमारे आन्सूओं के साथ कुछ शब्द सियासियों के ख़िलाफ़ कोई शब्द निकल भी गए तो उससे आप इतने हतप्रभ क्यों" . यदि आप चाहतें है की हम बिना टाई लगाए आपके सामने देश की अस्मिता एवं आम जीवन {जो छोटी-मोटी बात है आपकी नज़र में} रक्षा के लिए अनुरोध करें तो क्या आप हमारे दर्द को समझ सकेंगे. आप ने तो यहाँ तक कह दिया की आम जनता जो क्षुब्ध है वो किसी साजिश का पार्ट है तो हे महानायक इस वर्ष हुए आप चुनाव में 26 नवम्बर के एक दिन बाद हुई वोटिंग का प्रतिशत पिछले चुनावों के सापेक्ष अधिक है, उसकी शायद आपको जानकारी होगी ही. मित्र आपको सादर अभिवादन करते हुए बता देना चाहती हैं हम की एक वरिष्ट पत्रकार की राय क्या है "पत्रकार सईद नकवी साहब ने खुले तौर पर डिप्लोमेटिक रास्ते सुझाए आतंकवाद के विरुद्ध संवादों के अनुशासन की सलाह दी, वे सहज भावः से कह गए कि कारर्वाई के लिए 27 नवम्बर कि तिथि अनुकूल थी यानी कहीं न कहीं देश को पड़ोसी के लिए अपनी सोच का पुनरीक्षण करना चाहिए । " भवदीय भारतीय आम जनता