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Sunday, November 21, 2010

पी ए टू ऑनरेबल.........?

साभार गूगल बाबा के ज़रिये 
                                       राजा साहब अपने किलों को होटलों में बदल रहें हैं राजशाही का स्थान ले लिया लोक शाही ने यह  लोक शाही जिस  मूलाधार पर टिकी है "पी टू आनरेबुल..................." कहा जाता  है .....वे देश के लिए बेहद ज़रूरी तत्व हैं ,इस "तत्व " को कहतें हैं "पी टू आनरेबुल..................." इन की प्रजाति सचिवालयों/वरिष्ठ कार्यालयों   में पाई जाती है ये किसी माननीय जी के साथ अटैच कर दिए जाते हैं इनकी क्वालिटी ये होती है की ये सब कुछ में फिट अपन जैसे-मिसफिट .नहीं होते आवश्यकता अनुसार सिकुड़-पसर जाने वाले ये जीव ऐसे   पुर्जे  होते हैं जो फिट हो जातें हैं हर ".....जी"के साथ गोया कुण्डली का एक एक घर मिला के भेजा हो ऊपर वाले ने उनको । हर देश काल परिस्थिति के अनुसार इनका पौराणिक, प्राचीन,अर्वाचीन,अति नवीन सभी परिस्थियाँ में आवश्यक्तानुसार ऐसे जंतु को प्रभू द्वारा धारा पर भेजा जाता है. विधिवत बायोलाजिकल-पद्धति से . यानी ये जीव जन्म लेते हैं. कोई इनको अवतार न माने किंतु आचरण से अवतारी होने का आभास दिलातें हैं . इसे बिलकुल अन्यथा न लीजिये यदि मैं कहूं कि  ये अवतारी सामान होते हैं  इसके कई प्रमाण हैं  अधोगत रूप से पेश कर रहा हूँ :-
  1. अपने प्रभू से सीधा संपर्क
  2. अपनी निष्ठा से अपने प्रभू को बांधना 
  3. अपने-प्रभू के कुछेक दायित्वों को छोड़ शेष सभी दायित्वों का निर्वहन करना (छूटे दायित्व का अवसर मिल जाए तो चूकते नहीं )
  4.  प्रभू के लिए सर्व-सुविधा-संकलन संकल्प इनकी वृत्ति का मूल और आवश्यक गुण है.
  5. प्रभू आदेश का पालन नकारने वाले मानवों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई योजना बनाना एवं उसे क्रियान्वित करना. 
  6.   प्रभू के जाते ही नए अनुकूल प्रभू के लिए ईश्वर से याचना करना और सफल हो जाना 
  7. नए के समक्ष  बीते दिनों पुराने प्रभू का यशो गान न करना  
        यानी देश के लिए सबसे ज़रूरी इस वर्ग की उपादेयता को विस्मृत न किया जावे. और यू एन ओ में इस तरह के वर्ग के लिए एक दिन मनाने का प्रस्ताव रखा जावे.  
फोटो पर यदि किसी का अधिकार हो तो सूचित कीजिये .  

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