Monday, February 25, 2008

एक ख़त : पूर्णिमा वर्मन जी के नाम

http://abhivyakti-hindi.org/ <= लिंक पर उपलब्ध अभिव्यक्ति-अनुभूति की संपादिका को आज लिखे ख़त को सभी के लिए पोस्ट करना ज़रूरी है.....पूर्णिमा जी सादर अभिवादन आज ही जबलपुर में हिन्दी-साहित्य सम्मेलन जबलपुर जिला इकाई बैठक में आपकी चर्चा हुई। मो। मोइनुद्दीन "अतहर",प्रदीप"शशांक", सनातन बाजपेई जी,एवं श्री राम ठाकुर दादा आदि को प्राप्त सम्मान के लिए उन्हें शुभकामना देने का अवसर भी था , आज अभी-अभी अभिव्यक्ति पर छपी इस सूचना => "ये रचनाएँ मौलिक तथा अप्रकाशित होनी चाहिए। इन्हें किसी भी पत्र-पत्रिका, या वेब साइट अथवा ब्लॉग पर पहले प्रकाशित नहीं होना चाहिए। यदि बाद में यह पता चला कि रचना मौलिक नहीं थी या पहले प्रकाशित हो चुकी थी तो मानदेय की धनराशि का भुगतान रोका जा सकता है। यदि भुगतान कर देने के बाद इनके पूर्व प्रकाशित होने की जानकारी मिलती है तो भविष्य में उस कवि लेखक की रचनाओं का प्रकाशन अभिव्यक्ति व अनुभूति में हमेशा के लिए रोका जा सकता है।" के लिए आपके प्रति कृतज्ञ हूँ , आपकी इस पहल के बाद अन्य वेब-पत्रिकाएँ इसी तरह अलर्ट रहेगीं तो साहित्यिक-चौर्य-कर्म पर प्रतिबन्ध लगेगा। अंतर जाल पर साहित्य को लेकर भी आज बेहद प्रभावी चर्चा हुई बार बार आपका ज़िक्र सुन कर अच्छा लगा . शुभ कामनाओं के साथ गिरीश बिल्लोरे मुकुल प्रति, पूर्णिमा वर्मन, संपादक ,अभी-अनु, प्रतिलिपि:- वेब-पत्रिकाओं के संपादक गण

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