Thursday, February 21, 2008

साहित्यिक चोरी और हम सब

JEEVAN KEE BANJAR BHOOMI ,को दूसरे नाम से सृजनगाथा ने छापा या लेखक तनवीर ने छपवाया ये और बात है मुख्य मामला तो ये है कि मैंने साहित्यिक चोरी के खिलाफ़ पूरी ताक़त से मैंने आवाज़ उठाई ,मेरे करीब के लोग मुझे नसीहत देते नज़र आ रहे हैं। "तनवीर जाफरी ने बताया कि सृजनगाथा को नही भेजा आलेख उधर जयप्रकाश "मानस"जी ने ये देख http://www.srijangatha.com/Permanent%20matter/vichar-withi.htm& http://www.srijangatha.com/2007-08/july07/vicharvithi.htm कर उनसे सम्पर्क किया तो यही बात मानस जी ने सुनी फोन पर । अब चोरी है या तकनीकी गलती बात इस मुद्दे पे चली गयी सब को लग रहा है। वास्तव में तनवीर जाफरी ने लिखित जवाब न देकर अपने आप को बचाने की कोशिश भले की हों किन्तु बेनकाब हों गए बेचारे । चलो अब बहस शुरू करें असली वाली जिस देश में साहित्य मठाधीशी छाया में पनप रहा हों वहाँ चोरी चकारी संभाव संभव है । किन्तु हम चुप रहकर दोषी हैं । डाक्टर संध्या जैन श्रुति ,डाक्टर श्रीराम ठाकुर "दादा" ने बताया कि उनके आलेख,कवितायेँ भी इसी तरह चोरी गयी.....! उधर भोपाल के मशहूर पत्रकार विनय उपाद्याय की सहचरी की प्रकाशित रचना भी छपने उन्हीं के अखबार में छपने आयी । मेरा लक्ष्य "साहित्य में चोरी " के खिलाफ़ सभी साहित्य कारों की एक जुटता दर्शित करना है है।

JEEVAN KEE BANJAR BHOOMI

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