Monday, November 8, 2010

मानो या न मानो 02 :ज्योतिष : आप खुद परिस्थियों को भांप सकतें हैं

पिछली पोस्ट में मैंने बताया था कि पता नहीं मुझे किसने कुएं में गिर जाने से बचा लिया उस परा-शक्ति की तलाश आज भी है मुझे अपने इर्द गिर्द के वातावरण का एहसास काफी पहले हो जाता है इस बात की गवाह हैं दो  मेरे ज्योतिष विद ... जी हां इन दौनों से बार बार मैं पूछा करता कि  कि मेरी आसन्न समस्या किन कारणों से है दौनो ज्योतिष के साधक हैं किन्तु इस सवाल पर प्राय: नि:शब्द ही थे . या ऐसा ज़वाब देते  कहते थे कि नहीं सब कुछ पहले से भी उत्तम है पूरे आवेग से काम कीजिये सब कुछ आपके पक्ष में है. दूसरे के  अनुसार समस्या का हल हर चर्चा  के दौरान आज या कल में ही मिला. अंतत: जब मुझसे न रहा गया तो मैंने दौनों से ज़रा सख्त तरीका अपना कर आगे की बातें पूछी तब एक ने तो कहा:-"भाई,आपकी कुंडली में फलां फलां गृह की स्थिति है जो ऐसी स्थितियां   बना रहीं हैं. वास्तव में आपकी कुंडली त्रुटी पूर्ण बनी थी. जबकि मेरे मित्र ने कई बार उसी आधार पर अनुमान लगाए . दूसरे ज्योतिषाचार्य की स्थिति भी यही है. वे  आज तक न बता सके जबकि बार बार मैं महसूस कर रहा था तथा मुझे मालूम भी था कि मेरे इर्दगिर्द को शत्रु एकत्र हो गए हैं जो मेरा तुरंत अंत चाहते है. साथ ही मेरे कुछ मित्र (जिनसे मेरी अपेक्षाएं थीं) जानबूझकर कुछ   प्रशासनिक सूचनाएं मुझे नहीं देकर उन मित्रों का साथ दे रहे थे वे सूचनाएं मेरी कठिनाइयों का अंत सहज ही  कर देने के लिए ज़रूरी थीं किन्तु ऐसा विधाता की लेखनी से जो भी लिखा उसे भोगना ज़रूरी मानकर मैंने सब कुछ ईश्वर पर ही छोड़ दिया.मुझे हर होनी-अनहोनी का एहसास हो ही जाता है. यदि आप आत्म चिन्तन और एकाग्रता रखतें सच्ची प्रार्थना करतें हैं तो तय है कि आपके इर्द-गिर्द की आसन्न परिस्थियों का ज्ञान (पूर्वाभास) आपको आसानी से हो जावेगा. होता भी होगा. कुछ पाठकों को हुआ भी होगा .
  ज्योतिषाचार्यों के अंत:अध्ययन यानी साधना का स्तर  जितना स्तर होगा वो बस उतना ही बता सकते हैं. इसके आगे कतई नहीं. मुझे ज्योतिष पर गहन आस्था है पर केवल उस सीमा तक जहां मुझे पथ-प्रदर्शन की स्थिति साफ़ नज़र आती  आ जाये.. उससे आगे ज्योतिषविद जो उपाय बता्ते है वो सामान्य होते हैं  केवल आत्म संतुष्टि और उस स्थिति से विलग रखने के लिये. ताक़ि आप किसी गलत राह पर न निकल पड़ें . आप अपने ईष्ट की आराधना करतें तो पक्का आत्म-शक्ति में इज़ाफ़ा हो ही जाता है यही  आत्म शक्ति आपको सब कुछ बता देती है.
                                                        आज भी मुझे कई उन मित्रों पर भरोसा है जो मेरे खिलाफ किसी भी षडयंत्र का सहज ही महत्वपूर्ण भाग बन जाते हैं. एक मित्र ने तो मेरे ट्रांसफर रुकने के आदेश की कापी फ़ौरन मेरी प्रतिपक्षी को सौंप दी जिस बात का मुझे ज्ञान था. यह उसे आज़माने के लिए किया था हाथों हाथ कापी मित्र को उपलब्ध कराई ही इसी वज़ह से थी कि वो उसका ऐसा प्रयोग करे कि मुझे सत्य के परीक्षण में कठिनाई न हो.  . इसी दौरान एक और घटना घटी जिसका आभास मुझे था सारे मित्र एक प्लान बना रहे थे. वे मुझे अपनी योजना से बाहर रखना चाहते थे जबकि हमको एक काफी हाउस में मिलना था. सब के सब वहाँ पहुँच  गए हैं . एक ने तो यहाँ तक कह दिया कि अब हम इस ज़गह को (काफी-हाउस ) को छोड़ रहे हैं . मैंने भी कह दिया. हाँ मै भी काफी दूर हूँ कार ट्रेफिक में फंसी है. आप लोग जा सकते हैं. जान बूझ कर मैं ज़रा विलम्ब से ही गया सारे मित्र उस स्थान पर ही थे मुझे देख कर भौंचक्के रह गए. सफाई में काफी कुछ कहा उनने पर और मैंने मानने का अभिनय भी किया. और उन सबको एक अन्य स्थान पर ले गया काफी डोसा सब हुआ. सारा मुख्यालय  से एक फेक्स मंगाया गया जिसका प्रयोग मेरे पक्ष में कोर्ट में पेश होना था. इस आदेश में कुछ मित्रों के ट्रांसफर के आदेश भी भी थे.   सभी को कापी दी गईं एक मित्र जो शुरू से मुझसे ईर्ष्या रखता है उसकी कापी उसके घर भेजी गई. मुझे मालूम था कि इस आदेश के विरुद्द कोर्ट में मित्र जावेंगे हुआ भी यही और मित्रों ने इस आधार पर स्थगन ले लिया कि सरकार ने मुझे अनुचित लाभ देने के लिये उनका (मित्रों का) ट्रान्सफ़र किया है. जबकि सब कुछ रुटीन में हुआ था. इस घटना का उल्लेख इस कारण कर रहा हूं ताक़ि आप किसी से कोई उम्मीद न पालें . जब तेज़ हवाएं चलतीं हैं तो कौन सी वस्तु आप के पास आकर गिरती है या किस वस्तु को आप खो देतें हैं इसका कोई तय शुदा गणित नहीं होता मित्रों की भीड़ में मात्र एकाध ही सच्चा मित्र होता है शेष शनै:शनै मुश्किल के दौर में दूर हो जातें हैं तो मित्रता के मामले में भी आंतरिक प्रेरणा का सहारा लेना चाहिये . किसी से भी अपेक्षाएं पालना भी तो अनुचित है
कुल मिला कर आप यदि आपमें आत्म-शक्ति है आप "अंतरसंवेदित" हैं आपकी द्रष्टि सर्वव्यापी है तो तय है कि आप बिना किसी की सहायता के अपने इर्द-गिर्द के वातावरण का अनुमापन कर पाएंगें. ज्योतिष पर विश्वास पूर्वोक्त अनुसार ही  करें तो बेहतर है यकीन कीजिये  आप खुद परिस्थियों को भांप सकतें हैं  

5 comments:

उपेन्द्र said...

बिलकुल सही कह रहे आप ... अक्सर ऐसी परिस्थितिया बन जाती है जब हमें ऐसी चीजो पर बिस्वास करना पड़ता है.

कविता रावत said...

यदि आपमें आत्म-शक्ति है आप "अंतरसंवेदित" हैं आपकी द्रष्टि सर्वव्यापी है तो तय है कि आप बिना किसी की सहायता के अपने इर्द-गिर्द के वातावरण का अनुमापन कर पाएंगें....बिलकुल सही

निर्मला कपिला said...

अपसे सहमत हूँ। धन्यवाद।

Anonymous said...

अरे भाई जी अगर ज्योतिशी से आप इतना सब जान सकते है तो

आंन्तकवादी लोग जो लोगों का कत्ले आम कर रहें है बम विस्फोट

कर रहे हैं। इन आन्तकवादियों का क्यो पता नही लगा लेते है।

बम कहां रखा है या रखने वाले है क्यों पत नही लगा लेते है

कम से कम हजारों लोगों की जान ती बच जायेगी।

भारत मे इतने बड़े बड़े काण्ड हो जाते है कितने लोगों का मर्डर हो

जाता है मगर ज्योतिशी लोग बाद मे ज्ञान बघारने के लिये आते हैं।

ज्योतिषीयों के चक्कर मे कितनो का जीवन बर्बाद हो गया कितने मर

गये पता नही कितने घर फूट गये।

अंधो के शहर मे चश्मा और आईना खूब बिक रहा है।

Anonymous said...

ईश्वर से बड़ा कोई मित्र भाई या सम्बधी नही है।

ईश्वर से बड़ा कोई ज्योतिषि नही है।

मगर जब सच्चा ईश्वर मिल जाये।

और ईश्वर को कहीं ढूढ़ने की जरुरत नही है। आपके बगल मे

आपके सामने है यानी बहुत करीब है। आप उसका सही नाम लेकर

पुकारोगे वो आपको तुरंन्त उत्तर देगा। ढूढने वालो ने पा लिया है।