Friday, January 30, 2009

बापू बताओ.....!

हे राम ! और जय श्री राम में अब अंतर हो गया है र+अ +म+अ=राम अब सिर्फ़ शब्द रह गया है ! जो भी था राम उस राम में से खो गया है ! तब से अब तक मैं ही पिट रहा हूँ ! चल नहीं बापू मैं तो घिसट रहा हूँ !! आम आदमीं हूँ न ! ख़ास को मिलने वाले प्रिवलेज से वंचित हूँ बापू ये कहना :-" मिलने पर कुंठित हूँ "
बापू धर्म,वर्ण,वर्ग का शिकार प्रजातंत्र के ध्वज-वाहकों का सामंती व्यवहार ! बताओ बापू.... अब कितने गाल लाऊं

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